अलमारी साफ़ करते हुए एक स्केटबोर्ड निकला जो कई सालों से इस्तेमाल नहीं हुआ था। डेक तो बेशक जर्जर हो चुका है, पर बहुत दिनों बाद हाथ में लिया तो लगा कि उँगलियों में उस वक़्त का एहसास अब भी थोड़ा बाक़ी है।

कभी जिस दौर में दीवाना था

स्केटबोर्ड का दीवानापन बीस से तीस की उम्र के बीच रहा। छुट्टी के दिन पास के पार्क में ख़ूब अभ्यास करता था, और ऑली सीख लेने की उपलब्धि आज भी याद है। पता नहीं कब से दूर हो गया, लेकिन अब ये सामान देखते ही उस वक़्त की उमंग लौट आती है।

दूसरे एक्शन स्पोर्ट्स में भी हाथ आज़माए थे

सोचूँ तो स्केटबोर्ड के अलावा भी कई एक्शन स्पोर्ट्स में हाथ आज़माने का एक दौर रहा।

बास्केटबॉल खेलते हुए की तस्वीर

मिडिल स्कूल में शुरू किए बास्केटबॉल ने मुझे सीधे-सादे ढंग से शरीर हिलाने का मज़ा सिखाया।

स्नोबोर्डिंग की प्रतीकात्मक तस्वीर

सर्दियों में स्नोबोर्डिंग का भी शौक़ चढ़ा, और ढलान पर गिरते-पड़ते फिसलने का एहसास सीखता गया।

सर्फ़िंग की प्रतीकात्मक तस्वीर

सर्फ़िंग में लहर का इंतज़ार करने के वक़्त समेत, बोर्ड पर संतुलन साधने का एहसास मुझे स्केटबोर्ड के बहुत क़रीब लगता है।

KAZUKIN

SK8いいよね

सारांश

हर खेल में बोर्ड के ऊपर संतुलन साधने का एहसास एक जैसा लगता है। पहले सिर्फ़ पहिये और बेयरिंग नए करवाकर, बहुत दिनों बाद पास के पार्क में चलाकर देखने का इरादा है।

KAZUKIN स्टाइल रेटिंग

  • 🛹 स्केटबोर्ड के जोश की वापसी ★★★★☆
  • 🏀🏂🏄 एक्शन स्पोर्ट्स में बिना मर्यादा हाथ आज़माने की आदत ★★★★★
  • 🦵 असल में चलाने की गिनती (अब तक) ★☆☆☆☆ (मन ही मन तो चलाया)
  • 💰 पहिये और बेयरिंग बदलना ★☆☆☆☆ (अभी ख़रीदे नहीं)
  • 🧠 संतुलन की याद ★★★☆☆ (उँगलियों में अब भी बाक़ी है)